प्रसाद की काव्यभाषा


".... इस पुस्तक में जहाँ एक ओर प्रसाद की काव्य-भाषा का विकासात्मक और प्रतीतिपरक मूल्यात्मक विवेचन किया गया है वहीं दूसरी ओर संवेदना या जनता की चित्तवृत्ति में होने वाले परिवर्तनों के कारण खड़ी बोली के काव्यभाषा के रूप में विकास का भी अत्यंत व्यवस्थित वर्णन है।... "

-- सत्यप्रकाश मिश्र

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